Solar Panel: बिजली के बढ़ते बिलों के बीच आज लाखों लोग अपने घरों, दुकानों और फैक्ट्रियों में सोलर सिस्टम लगवा रहे हैं। सोलर पैनल एक बार इंस्टॉल होने के बाद करीब 25 साल तक बिजली उत्पादन करने में सक्षम होते हैं। हालांकि, समय के साथ उनकी क्षमता धीरे-धीरे कम होना सामान्य बात है। लेकिन यदि नया या कुछ साल पुराना सोलर सिस्टम भी पहले जितनी बिजली नहीं बना रहा है, तो इसके पीछे कई तकनीकी और सामान्य कारण हो सकते हैं। अच्छी बात यह है कि इनमें से ज्यादातर समस्याओं का समय रहते पता लगाकर आसानी से समाधान किया जा सकता है।
Solar Panel: हर मौसम में बराबर बिजली बनना जरूरी नहीं
कई लोग यह सोचकर परेशान हो जाते हैं कि गर्मियों की तुलना में मानसून या सर्दियों में उनका सोलर सिस्टम कम बिजली बना रहा है। दरअसल, यह पूरी तरह सामान्य स्थिति है। सोलर पैनल सीधे सूर्य की रोशनी पर निर्भर करते हैं। बरसात के मौसम में बादल अधिक रहने और सर्दियों में दिन छोटे होने के कारण पैनलों तक कम धूप पहुंचती है। यही वजह है कि इन मौसमों में बिजली उत्पादन स्वाभाविक रूप से कम हो जाता है।
धूल और गंदगी घटा सकती है बिजली उत्पादन
भारत जैसे देशों में धूल, मिट्टी, प्रदूषण, पक्षियों की बीट और सूखे पत्ते सोलर पैनलों की कार्यक्षमता को काफी प्रभावित करते हैं। जब पैनलों की सतह पर गंदगी जमा हो जाती है, तो सूर्य की किरणें सीधे सोलर सेल तक नहीं पहुंच पातीं। इससे बिजली उत्पादन में 10 से 30 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है। यदि आपका घर हाईवे, औद्योगिक क्षेत्र या निर्माण स्थल के पास है, तो पैनलों की सफाई नियमित रूप से करना और भी जरूरी हो जाता है।
छाया पड़ने से भी घट जाती है एफिशिएंसी
सोलर पैनल पर थोड़ी-सी छाया भी पूरे सिस्टम के प्रदर्शन को प्रभावित कर सकती है। कई बार आसपास के पेड़, पानी की टंकी, मोबाइल टावर, एंटीना या नई बनी इमारतों की वजह से पैनलों पर छाया पड़ने लगती है। समय के साथ पेड़ों की शाखाएं भी बड़ी हो जाती हैं और पहले की तुलना में ज्यादा धूप रोकने लगती हैं। इसलिए समय-समय पर यह जांचना जरूरी है कि कहीं किसी वजह से पैनलों पर छाया तो नहीं पड़ रही।
तेज गर्मी हमेशा फायदेमंद नहीं होती
अक्सर लोगों को लगता है कि जितनी ज्यादा गर्मी होगी, सोलर पैनल उतनी ज्यादा बिजली बनाएंगे। लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं है। सोलर पैनल को तेज धूप की जरूरत होती है, अत्यधिक तापमान की नहीं। जब पैनल का तापमान बहुत ज्यादा बढ़ जाता है, तो उसकी कार्यक्षमता कम होने लगती है। इसलिए गर्मियों की दोपहर में तेज धूप होने के बावजूद बिजली उत्पादन उम्मीद से कम दिखाई दे सकता है।
इन्वर्टर की खराबी भी हो सकती है बड़ी वजह
सोलर सिस्टम में इन्वर्टर सबसे महत्वपूर्ण उपकरणों में से एक होता है। यदि इन्वर्टर सही तरीके से काम नहीं कर रहा है, बार-बार ट्रिप हो रहा है या उसमें तकनीकी खराबी आ गई है, तो बिजली उत्पादन पर सीधा असर पड़ता है। कई आधुनिक इन्वर्टर डिस्प्ले या मोबाइल ऐप के जरिए एरर मैसेज भी दिखाते हैं। ऐसे संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
ढीली वायरिंग और खराब कनेक्शन भी बनते हैं समस्या
समय के साथ वायरिंग ढीली होना, कनेक्टर खराब होना या चूहों द्वारा तारों को नुकसान पहुंचाना भी बिजली उत्पादन कम होने का कारण बन सकता है। कई बार यह समस्या बाहर से दिखाई नहीं देती, लेकिन इसके कारण सिस्टम पूरी क्षमता से काम नहीं कर पाता। इसलिए समय-समय पर पूरे सिस्टम की तकनीकी जांच कराना फायदेमंद रहता है।
पुराने होने पर स्वाभाविक रूप से घटती है क्षमता
हर सोलर पैनल की कार्यक्षमता समय के साथ धीरे-धीरे कम होती है। अच्छी गुणवत्ता वाले पैनल कई वर्षों तक बेहतर प्रदर्शन करते हैं, लेकिन लंबे समय तक लगातार उपयोग के बाद उनकी बिजली बनाने की क्षमता में हल्की गिरावट आना सामान्य बात है। यदि पैनल की गुणवत्ता कम हो या उसका रखरखाव सही तरीके से न किया जाए, तो यह गिरावट अपेक्षा से पहले भी दिखाई दे सकती है।
हॉटस्पॉट और माइक्रो क्रैक को नजरअंदाज न करें
यदि किसी सोलर पैनल में हॉटस्पॉट बन जाए, सेल डैमेज हो जाए या माइक्रो क्रैक आ जाए, तो बिजली उत्पादन तेजी से कम हो सकता है। कई बार ये नुकसान आंखों से दिखाई नहीं देते और विशेष उपकरणों से जांच करने पर ही पता चलते हैं। यदि अचानक बिजली उत्पादन बहुत कम हो जाए या किसी पैनल का एक हिस्सा असामान्य रूप से गर्म हो रहा हो, तो तुरंत विशेषज्ञ की मदद लेनी चाहिए।
कैसे पहचानें कि आपका सोलर सिस्टम सही काम कर रहा है?
यदि आपके सोलर सिस्टम में मॉनिटरिंग ऐप या डिजिटल डिस्प्ले उपलब्ध है, तो रोजाना बनने वाली यूनिट्स पर नजर रखें। पिछले महीनों और पिछले साल के उसी मौसम के आंकड़ों से तुलना करें। यदि मौसम सामान्य होने के बावजूद बिजली उत्पादन में अचानक बड़ी गिरावट दिखाई दे, तो पहले पैनलों की सफाई करें, छाया की जांच करें और इन्वर्टर में कोई एरर तो नहीं है, यह देखें। इसके बाद भी समस्या बनी रहती है, तो तकनीकी जांच कराना जरूरी है।
बिजली उत्पादन बढ़ाने के आसान उपाय
सोलर सिस्टम को बेहतर प्रदर्शन के लिए नियमित सफाई करना सबसे जरूरी है। पैनलों पर छाया न पड़ने दें, समय-समय पर वायरिंग और इन्वर्टर की जांच करवाएं, बिजली उत्पादन की नियमित निगरानी करें और साल में कम से कम एक बार पूरे सिस्टम की प्रोफेशनल सर्विस जरूर कराएं। इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखने से आपका सोलर सिस्टम लंबे समय तक अधिकतम क्षमता के साथ काम करेगा।
कब बुलाएं एक्सपर्ट?
यदि पैनलों में दरार दिखाई दे, हॉटस्पॉट बनने लगे, इन्वर्टर बार-बार बंद हो, बिजली उत्पादन अचानक बहुत कम हो जाए या सफाई के बाद भी कोई सुधार न आए, तो खुद मरम्मत करने की बजाय किसी अनुभवी सोलर टेक्नीशियन को बुलाना बेहतर रहेगा। समय पर जांच कराने से बड़ी खराबी और अतिरिक्त खर्च से बचा जा सकता है।
सोलर पैनल का बिजली उत्पादन कम होना हमेशा किसी बड़ी खराबी का संकेत नहीं होता। कई बार इसकी वजह धूल, मौसम, छाया या नियमित रखरखाव की कमी होती है। वहीं कुछ मामलों में इन्वर्टर, वायरिंग या पैनल के अंदर तकनीकी खराबी भी जिम्मेदार हो सकती है। यदि समय-समय पर सिस्टम की सफाई, मॉनिटरिंग और सर्विसिंग की जाए, तो सोलर सिस्टम कई वर्षों तक बेहतरीन प्रदर्शन करता है और बिजली के बिल में अधिकतम बचत दिलाने में मदद करता है।
