Natural Disasters Around the World:- कभी आसमान से पानी कहर बनकर गिरता है, कभी धरती कांप उठती है और कभी कोई शांत पड़ा ज्वालामुखी अचानक आग उगलने लगता है। दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से लगातार सामने आ रही प्राकृतिक आपदाओं ने एक बार फिर इंसान को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर प्रकृति हमें क्या संकेत दे रही है?
ताजा मामला इंडोनेशिया का है, जहां Anak Krakatau ज्वालामुखी के लगातार हो रहे विस्फोट ने हजारों लोगों की यात्रा को प्रभावित कर दिया। ज्वालामुखी से निकली राख करीब 50,000 फीट की ऊंचाई तक पहुंची और इसके चलते कई एयरपोर्ट बंद करने पड़े। सोमवार तक 1,550 से ज्यादा उड़ानें रद्द होने और करीब 1.7 लाख यात्रियों के प्रभावित होने की रिपोर्ट सामने आई। लेकिन कहानी सिर्फ इंडोनेशिया तक सीमित नहीं है।
इसी समय चीन के दक्षिण-पूर्वी हिस्सों में Typhoon Saudel ने भारी बारिश और बाढ़ की स्थिति पैदा कर दी। लाखों लोगों को प्रभावित क्षेत्रों से निकालना पड़ा। कुछ इलाकों में 24 घंटे के भीतर 400 मिलीमीटर से ज्यादा बारिश दर्ज की गई और कई जगहों पर बाढ़ ने सामान्य जीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया।
उधर हिमालयी क्षेत्र भी पिछले कुछ समय से लगातार गंभीर प्राकृतिक घटनाओं का सामना कर रहा है। नेपाल में हाल की विनाशकारी बाढ़ ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि बदलती जलवायु और तेजी से गर्म होते हिमालय का आने वाले वर्षों में क्या असर होगा। वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों के अनुसार, ग्लेशियरों के पिघलने और बदलते मौसम के कारण फ्लैश फ्लड, भूस्खलन और दूसरी प्राकृतिक घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है।
क्या प्रकृति सच में हमें चेतावनी दे रही है?
यह कहना वैज्ञानिक रूप से सही नहीं होगा कि दुनिया में होने वाली हर प्राकृतिक आपदा सीधे जलवायु परिवर्तन की वजह से हो रही है। ज्वालामुखी विस्फोट और भूकंप जैसी घटनाओं के पीछे पृथ्वी की अपनी भूगर्भीय प्रक्रियाएं होती हैं।
लेकिन दूसरी तरफ यह भी सच है कि जलवायु परिवर्तन कई तरह की चरम मौसम घटनाओं के जोखिम और उनकी तीव्रता को प्रभावित कर सकता है। यही वजह है कि जब दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में बाढ़, अत्यधिक गर्मी, तूफान और दूसरी मौसम संबंधी घटनाएं सामने आती हैं तो वैज्ञानिक इनके पीछे बदलते climate patterns को भी गंभीरता से देखते हैं।
इंडोनेशिया का मामला थोड़ा अलग है। यह देश Pacific Ring of Fire पर स्थित है और यहां दुनिया के किसी भी अन्य देश की तुलना में सक्रिय ज्वालामुखियों की संख्या बहुत अधिक है। इसलिए यहां ज्वालामुखी और भूकंप का खतरा प्राकृतिक रूप से ज्यादा है। Reuters के अनुसार इंडोनेशिया में 100 से अधिक सक्रिय ज्वालामुखी हैं।
इंसान के लिए सबसे बड़ी चेतावनी क्या है?
शायद सवाल यह नहीं होना चाहिए कि “प्रकृति हमसे नाराज है या नहीं?”
सवाल यह होना चाहिए कि “क्या हम प्रकृति के बदलते संकेतों को समझने के लिए तैयार हैं?”
आज तकनीक पहले से कहीं ज्यादा विकसित है। हमारे पास सैटेलाइट हैं, मौसम की भविष्यवाणी करने वाले सिस्टम हैं, ज्वालामुखियों और भूकंपों की निगरानी करने वाली एजेंसियां हैं और आपदा से पहले लोगों को चेतावनी देने के कई साधन मौजूद हैं।
फिर भी एक बड़ी आपदा कुछ ही घंटों में हजारों लोगों की जिंदगी बदल सकती है।
Anak Krakatau इसका ताजा उदाहरण है। राख के बादल ने केवल आसमान को नहीं बदला, बल्कि विमान सेवाओं, स्कूलों और हजारों यात्रियों की योजनाओं को भी प्रभावित कर दिया। अधिकारियों को लोगों से मास्क पहनने और राख के संपर्क से बचने की सलाह देनी पड़ी।
2018 की याद ने बढ़ाई चिंता
Anak Krakatau का नाम इसलिए भी लोगों को चिंता में डालता है क्योंकि इसी ज्वालामुखी की गतिविधि से 2018 में एक विनाशकारी सुनामी पैदा हुई थी। उस घटना में 400 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी।
हालांकि इस बार अधिकारियों ने तत्काल किसी सुनामी का खतरा नहीं बताया है और बड़े पैमाने पर evacuation का आदेश भी नहीं दिया गया है। लोगों को ज्वालामुखी के क्रेटर से कम से कम तीन किलोमीटर दूर रहने की सलाह दी गई है।
प्रकृति का संदेश क्या है?
शायद प्रकृति कोई संदेश शब्दों में नहीं देती।
लेकिन जब कहीं ज्वालामुखी फटता है, कहीं रिकॉर्ड बारिश होती है, कहीं बाढ़ शहरों में घुस जाती है और कहीं पहाड़ टूट जाते हैं, तो ये घटनाएं हमें एक बात जरूर याद दिलाती हैं—इंसान कितना भी आधुनिक क्यों न हो जाए, वह प्रकृति की ताकत से बड़ा नहीं हो सकता।
इसलिए जरूरत डरने की नहीं, बल्कि तैयार रहने की है।
बेहतर मौसम चेतावनी प्रणाली, मजबूत infrastructure, जंगलों और नदियों की सुरक्षा, सुरक्षित urban planning और प्राकृतिक आपदाओं के प्रति जागरूकता आने वाले समय में हमारी सबसे बड़ी जरूरत हो सकती है।
क्योंकि सवाल सिर्फ यह नहीं है कि अगली आपदा कब आएगी।
सवाल यह है कि जब आएगी, तब क्या हम तैयार होंगे?
