Painkiller Side Effects: सिर दर्द हो, बदन दर्द हो, बुखार हो या फिर मांसपेशियों में खिंचाव—आजकल लोग छोटी सी परेशानी में भी तुरंत पेन किलर का सहारा लेने लगे हैं। बाजार में आसानी से मिलने वाली ये दवाएं कुछ ही मिनटों में राहत देती हैं, इसलिए लोग बिना ज्यादा सोचे इन्हें इस्तेमाल कर लेते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि बार-बार दर्द की गोली लेना शरीर के लिए कितना सुरक्षित है? कई बार लोग इसे मामूली दवा समझकर जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल करने लगते हैं, जबकि लगातार सेवन शरीर के अंदर धीरे-धीरे नुकसान पहुंचा सकता है।
पेन किलर दवाएं दर्द, सूजन और बुखार कम करने में मदद करती हैं। आमतौर पर डॉक्टर इन्हें सीमित समय और सही मात्रा में लेने की सलाह देते हैं। लेकिन जब लोग डॉक्टर की सलाह के बिना लंबे समय तक इनका इस्तेमाल करते हैं, तब यही दवाएं शरीर के महत्वपूर्ण अंगों पर असर डाल सकती हैं। खासतौर पर किडनी, लिवर और पेट पर इसका प्रभाव देखा गया है।
Painkiller Side Effects: पेन किलर शरीर में कैसे काम करती है?
जब शरीर में दर्द या सूजन होती है, तब कुछ केमिकल्स एक्टिव हो जाते हैं जो दर्द का संकेत दिमाग तक पहुंचाते हैं। पेन किलर इन केमिकल्स को ब्लॉक कर दर्द कम करने का काम करती हैं। यही वजह है कि गोली खाने के कुछ समय बाद आराम महसूस होने लगता है। लेकिन शरीर में लगातार इन दवाओं का असर बने रहने से अंगों पर दबाव बढ़ने लगता है।
कई लोग माइग्रेन, पीठ दर्द, घुटनों का दर्द या पुरानी चोट के कारण नियमित रूप से दर्द की दवा लेते रहते हैं। शुरुआत में इसका असर सामान्य लगता है, लेकिन धीरे-धीरे शरीर इसकी आदत बना लेता है और व्यक्ति बार-बार दवा लेने लगता है। यही आदत आगे चलकर जोखिम बढ़ा सकती है।
सबसे ज्यादा असर किडनी पर क्यों पड़ता है?
किडनी शरीर का वह अंग है जो खून को फिल्टर कर गंदगी बाहर निकालने का काम करती है। जब कोई व्यक्ति लंबे समय तक दर्द की दवाएं लेता है, तो किडनी में ब्लड फ्लो प्रभावित हो सकता है। इससे किडनी को पर्याप्त ऑक्सीजन और पोषण नहीं मिल पाता। धीरे-धीरे इसका असर उसकी कार्यक्षमता पर पड़ने लगता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, ज्यादा मात्रा में दर्द निवारक दवाएं लेने से किडनी की छोटी रक्त वाहिकाएं प्रभावित हो सकती हैं। इससे शरीर में टॉक्सिन जमा होने लगते हैं और किडनी कमजोर पड़ सकती है। जिन लोगों को पहले से डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर या किडनी की बीमारी है, उन्हें इस मामले में ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत होती है।
लिवर और पेट पर भी हो सकता है असर
कई लोग सोचते हैं कि दर्द की दवा सिर्फ किडनी को नुकसान पहुंचाती है, लेकिन ऐसा नहीं है। कुछ पेन किलर दवाओं का ज्यादा इस्तेमाल लिवर पर भी दबाव डाल सकता है। खासकर तब, जब व्यक्ति शराब पीता हो या पहले से लिवर से जुड़ी समस्या हो।
इसके अलावा पेट पर भी असर देखने को मिलता है। लगातार दर्द की गोली लेने से पेट की अंदरूनी परत प्रभावित हो सकती है। इससे गैस, एसिडिटी, अल्सर और कभी-कभी पेट में ब्लीडिंग जैसी समस्या भी हो सकती है। यही कारण है कि डॉक्टर कई बार खाने के बाद दवा लेने की सलाह देते हैं।
कौन लोग रहें सबसे ज्यादा सावधान?
हर व्यक्ति के लिए पेन किलर का असर अलग हो सकता है। कुछ लोगों में इसके दुष्प्रभाव जल्दी दिखाई देते हैं, जबकि कुछ में धीरे-धीरे समस्या बढ़ती है। खासतौर पर कुछ लोग हाई रिस्क कैटेगरी में आते हैं।
- जिन लोगों को पहले से किडनी की बीमारी है
- हाई ब्लड प्रेशर के मरीज
- बुजुर्ग लोग
- डायबिटीज से पीड़ित व्यक्ति
- लंबे समय से किसी दर्द की समस्या से जूझ रहे लोग
- रोजाना कई तरह की दवाएं लेने वाले मरीज
इन लोगों को बिना डॉक्टर की सलाह दर्द की दवा लेने से बचना चाहिए।
ज्यादा मात्रा में सेवन क्यों बन सकता है खतरनाक?
कई बार लोग सोचते हैं कि एक गोली से आराम नहीं मिला तो दूसरी ले लेते हैं। यही आदत शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकती है। हर दवा की एक तय सीमा होती है। उससे ज्यादा मात्रा लेने पर शरीर के अंदर के अंगों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। कुछ लोग लगातार कई दिनों तक दर्द की दवा लेते रहते हैं, जिससे शरीर को रिकवरी का समय नहीं मिल पाता। इससे दवा का असर जमा होने लगता है और साइड इफेक्ट्स का खतरा बढ़ जाता है।
पेन किलर लेते समय किन बातों का रखें ध्यान?
अगर दर्द की दवा लेना जरूरी हो, तो कुछ सावधानियां अपनाना बेहद जरूरी है। इससे शरीर को नुकसान पहुंचने का खतरा कम हो सकता है। सबसे पहले हमेशा दवा का लेबल पढ़ें और तय मात्रा से ज्यादा सेवन न करें। डॉक्टर की सलाह के बिना लंबे समय तक पेन किलर लेना सही नहीं माना जाता। शरीर में पानी की कमी न होने दें, क्योंकि डिहाइड्रेशन से किडनी पर दबाव बढ़ सकता है। इसके अलावा एक साथ कई दवाओं का सेवन करने से बचें। कई बार अलग-अलग दवाओं में समान तत्व मौजूद होते हैं, जिससे ओवरडोज का खतरा बढ़ जाता है।
कब डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी हो जाता है?
अगर आपको लंबे समय तक दर्द की दवा लेनी पड़ रही है, तो यह संकेत हो सकता है कि शरीर में कोई गंभीर समस्या मौजूद है। ऐसे में डॉक्टर से जांच कराना जरूरी हो जाता है। अगर दवा लेने के बाद पेशाब कम आने लगे, सूजन महसूस हो, पेट में तेज दर्द हो, लगातार कमजोरी रहे या बार-बार उल्टी जैसी परेशानी हो, तो तुरंत मेडिकल सलाह लेनी चाहिए।
डॉक्टर खून और यूरिन टेस्ट के जरिए किडनी की स्थिति का पता लगा सकते हैं। शुरुआती जांच से यह समझा जा सकता है कि शरीर दवाओं को किस तरह हैंडल कर रहा है और कहीं कोई नुकसान शुरू तो नहीं हो चुका।
दर्द की दवा लेते समय संतुलन ही है सबसे बड़ा उपाय
पेन किलर दवाएं पूरी तरह खराब नहीं होतीं। सही मात्रा और सीमित समय तक इस्तेमाल करने पर ये सुरक्षित मानी जाती हैं। समस्या तब शुरू होती है जब लोग बिना जरूरत या बिना सलाह के इनका लगातार सेवन करने लगते हैं। दर्द से राहत जरूरी है, लेकिन शरीर के अंदरूनी अंगों की सुरक्षा उससे भी ज्यादा जरूरी है। इसलिए हर दवा को समझदारी से लेना चाहिए। छोटी सी लापरवाही भविष्य में बड़ी बीमारी का कारण बन सकती है।
