Vice President of India 2025 result: सी.पी. राधाकृष्णन की ऐतिहासिक जीत
नई दिल्ली, 9 सितंबर 2025 – भारत को नया उपराष्ट्रपति मिल गया है। आज हुए उपराष्ट्रपति चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के उम्मीदवार और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के वरिष्ठ नेता चंद्रपुरम पोनुसामी (सी.पी.) राधाकृष्णन ने शानदार जीत हासिल की। वे भारत के 15वें उपराष्ट्रपति बने हैं। यह चुनाव समय से पहले इसलिए हुआ क्योंकि पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने जुलाई 2025 में स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा दे दिया था, जबकि उनका कार्यकाल 2027 तक था।
Vice President of India 2025 result: सी.पी. राधाकृष्णन कौन हैं?
सी.पी. राधाकृष्णन का जन्म 20 अक्टूबर 1957 को तमिलनाडु के तिरुपुर में हुआ। वे लंबे समय से बीजेपी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े हुए हैं। राधाकृष्णन ओबीसी गौंडर-कोंगु वेल्लार समुदाय से आते हैं।
उनका राजनीतिक सफर बेहद विविध रहा है – वे 1998 और 1999 में कोयंबटूर से सांसद चुने गए, बीजेपी तमिलनाडु अध्यक्ष रहे, कपड़ा उद्योग में व्यवसायी रहे और हाल ही में महाराष्ट्र व झारखंड के राज्यपाल भी बने। 17 अगस्त 2025 को एनडीए ने उनकी उम्मीदवारी का ऐलान किया था।
अब वे भारत के उपराष्ट्रपति बनने के साथ-साथ राज्यसभा के पदेन सभापति की जिम्मेदारी भी निभाएंगे।
उपराष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया
भारतीय उपराष्ट्रपति का चुनाव संविधान के अनुच्छेद 66 के तहत होता है।
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योग्यता: उम्मीदवार भारतीय नागरिक होना चाहिए, न्यूनतम आयु 35 वर्ष, राज्यसभा सदस्य बनने की पात्रता हो और किसी लाभ के पद पर न हो।
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निर्वाचक मंडल: संसद के दोनों सदनों (लोकसभा + राज्यसभा) के सभी निर्वाचित और नामित सदस्य वोट डालते हैं। इस बार कुल 781 सांसद पात्र थे।
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मतदान प्रणाली: गुप्त मतदान और एकल हस्तांतरणीय मत (STV) पद्धति के जरिए। प्रत्येक सांसद का वोट मूल्य “1” होता है।
चुनाव कार्यक्रम
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अधिसूचना जारी: 7 अगस्त 2025
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नामांकन की अंतिम तिथि: 21 अगस्त
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मतदान: 9 सितंबर 2025
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नतीजे: मतदान के तुरंत बाद शाम 7:30 बजे घोषित किए गए
मतदान और नतीजे
इस चुनाव में 767 सांसदों ने वोट डाले, जिनमें से 752 मत मान्य पाए गए और 15 वोट अमान्य रहे।
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सी.पी. राधाकृष्णन (NDA) – 452 वोट (60.10%)
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बी. सुधर्शन रेड्डी (INDIA ब्लॉक) – 300 वोट (39.90%)
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जीत का अंतर – 152 वोट (पिछले 20 वर्षों में सबसे कम अंतर)
मतदान प्रतिशत 98% से अधिक रहा, जो हाल के चुनावों में रिकॉर्ड माना जा रहा है। हालांकि, क्रॉस-वोटिंग की घटनाएं भी सामने आईं, जिसने राधाकृष्णन की जीत को और मजबूत किया।
विपक्षी उम्मीदवार बी. सुधर्शन रेड्डी
विपक्ष ने इस चुनाव में पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज बी. सुधर्शन रेड्डी को उम्मीदवार बनाया था। उनका जन्म 8 जुलाई 1946 को तेलंगाना में हुआ था। वे 2007 से 2011 तक सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश रहे और सामाजिक न्याय व पर्यावरण से जुड़े फैसलों के लिए जाने जाते हैं। गौहाटी हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश भी रह चुके रेड्डी को इंडिया ब्लॉक (कांग्रेस, डीएमके, तृणमूल आदि) ने समर्थन दिया। उन्होंने सम्मानजनक प्रदर्शन किया लेकिन क्रॉस-वोटिंग के चलते विपक्ष की रणनीति कमजोर पड़ गई।
राजनीतिक महत्व
राधाकृष्णन की जीत ने एक बार फिर एनडीए की संसद पर पकड़ को मजबूत साबित किया है। हालांकि विपक्ष को 40% से अधिक वोट मिले, जो 2022 के चुनाव की तुलना में सुधार है। यह चुनाव 1987 के बाद पहला मौका था जब उपराष्ट्रपति चुनाव समय से पहले हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कई वरिष्ठ नेताओं ने राधाकृष्णन को जीत की बधाई दी और इसे भारतीय लोकतंत्र की मजबूती बताया।
सी.पी. राधाकृष्णन का उपराष्ट्रपति बनना सिर्फ एनडीए के लिए नहीं, बल्कि भारतीय राजनीति में दक्षिण भारत से एक मजबूत प्रतिनिधित्व के रूप में भी देखा जा रहा है। उनकी गैर-टकराव वाली छवि से उम्मीद है कि वे राज्यसभा को संतुलित और सम्मानजनक तरीके से संचालित करेंगे।
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