India Oil Supply: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ईरान से जुड़े युद्ध जैसे हालात ने पूरी दुनिया की नजर तेल बाजार पर टिका दी है। जब भी इस क्षेत्र में सैन्य टकराव की खबर आती है तो सबसे पहले कच्चे तेल की कीमतों में उथल-पुथल देखने को मिलती है। लेकिन इस बार भारत के लिए फिलहाल राहत भरी खबर सामने आई है। जानकारी के मुताबिक भारत की ओर कच्चे तेल के कई जहाज रवाना हो चुके हैं और सप्लाई फिलहाल सामान्य बनी हुई है। इसका मतलब है कि चाहे तनाव कितना भी बढ़े, अभी तुरंत भारत में तेल संकट जैसी स्थिति बनने की संभावना नहीं दिख रही।
India Oil Supply: भारत की तेल जरूरत और आयात पर निर्भरता
भारत दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा उपभोक्ताओं में से एक है। देश की अर्थव्यवस्था, परिवहन और उद्योगों का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल पर निर्भर करता है। लेकिन भारत में जितना तेल इस्तेमाल होता है, उसका अधिकांश हिस्सा विदेशों से आयात करना पड़ता है। आंकड़ों के मुताबिक भारत अपनी कुल जरूरत का करीब 85 से 90 प्रतिशत कच्चा तेल दूसरे देशों से खरीदता है।
यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों या सप्लाई में हल्का सा बदलाव भी भारत की अर्थव्यवस्था पर असर डाल सकता है।
मिडिल ईस्ट पर क्यों टिकी रहती है भारत की नजर
मिडिल ईस्ट दुनिया का सबसे बड़ा तेल उत्पादन क्षेत्र माना जाता है। सऊदी अरब, इराक, यूएई और कुवैत जैसे बड़े तेल उत्पादक देश इसी इलाके में मौजूद हैं। भारत भी लंबे समय से इन देशों से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदता रहा है।
पिछले कुछ समय में भारत ने रूस से भी बड़ी मात्रा में सस्ता तेल खरीदा था, लेकिन हाल के महीनों में फिर से मिडिल ईस्ट से आयात बढ़ाया गया है। इसलिए इस क्षेत्र में तनाव बढ़ने की खबरों ने बाजार में चिंता जरूर पैदा की, लेकिन अभी तक सप्लाई पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा है।
समुद्री रास्ता बना सबसे अहम फैक्टर
मिडिल ईस्ट से दुनिया के कई देशों तक तेल समुद्री मार्ग से पहुंचता है। यह रास्ता वैश्विक तेल सप्लाई के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। भारत के लिए भी यह मार्ग अहम है क्योंकि देश के बड़े हिस्से का तेल आयात इसी समुद्री रास्ते से होता है।
अगर इस मार्ग पर किसी तरह का सैन्य टकराव होता है या जहाजों की आवाजाही रुकती है, तो दुनिया भर में तेल की कीमतें अचानक बढ़ सकती हैं। लेकिन फिलहाल जहाजों की आवाजाही सामान्य बनी हुई है और भारत के लिए कच्चे तेल की सप्लाई जारी है।
भारत ने पहले से कर रखी है तैयारी
संभावित संकट को देखते हुए भारत ने पहले से कई कदम उठाए हुए हैं। देश में रणनीतिक तेल भंडार बनाए गए हैं ताकि किसी आपात स्थिति में कुछ समय तक तेल की कमी महसूस न हो। इसके अलावा भारतीय तेल कंपनियां अलग-अलग देशों से तेल खरीदने की रणनीति पर भी काम करती रहती हैं।
जरूरत पड़ने पर रूस, अमेरिका और अन्य तेल उत्पादक देशों से भी अतिरिक्त सप्लाई ली जा सकती है। यही वजह है कि मौजूदा हालात में भारत के पास कई विकल्प मौजूद हैं।
लंबा युद्ध हुआ तो बढ़ सकती है चिंता
हालांकि अभी स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर मिडिल ईस्ट में संघर्ष लंबा चलता है तो इसका असर तेल बाजार पर पड़ सकता है। ऐसे में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आ सकती है और भारत का आयात बिल भी बढ़ सकता है।
अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होता है तो इसका असर सीधे पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर दिखाई दे सकता है। इसके साथ ही महंगाई पर भी दबाव बढ़ने की संभावना रहती है।
फिलहाल भारत के लिए राहत की स्थिति
कुल मिलाकर देखा जाए तो ईरान से जुड़े तनाव के बावजूद भारत के लिए फिलहाल राहत की स्थिति बनी हुई है। कच्चे तेल के जहाज लगातार भारत की ओर आ रहे हैं और देश में सप्लाई सामान्य बनी हुई है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय हालात तेजी से बदल सकते हैं, इसलिए सरकार और तेल कंपनियां मिडिल ईस्ट की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। अगर हालात बिगड़ते हैं तो भारत के पास वैकल्पिक सप्लाई और भंडारण की रणनीति पहले से मौजूद है, जिससे बड़े संकट से निपटा जा सके।
