Zomato: फूड डिलीवरी सेक्टर की दिग्गज कंपनी Zomato को लेकर एक बार फिर बड़ा खुलासा सामने आया है। जोमैटो की पैरेंट कंपनी Eternal के फाउंडर और CEO दीपिंदर गोयल ने हाल ही में यूट्यूबर राज शमानी के पॉडकास्ट में गिग वर्क मॉडल से जुड़ी कई अहम बातें साझा कीं, जिसने स्टार्टअप और रोजगार जगत में हलचल मचा दी है।
दीपिंदर गोयल के मुताबिक, Zomato की फूड डिलीवरी यूनिट में हर महीने हजारों गिग वर्कर्स प्लेटफॉर्म से बाहर हो जाते हैं, जिनमें कुछ को नियम उल्लंघन के चलते हटाया जाता है, जबकि बड़ी संख्या में लोग खुद ही काम छोड़ देते हैं।
Zomato: खुद नौकरी छोड़ने वालों की संख्या कहीं ज्यादा
CEO ने बताया कि केवल कंपनी द्वारा हटाए गए वर्कर्स ही नहीं, बल्कि हर महीने करीब डेढ़ से दो लाख डिलीवरी पार्टनर खुद ही काम छोड़ देते हैं।
इसके साथ ही उतनी ही संख्या में नए लोग प्लेटफॉर्म से जुड़ते भी हैं। यानी Zomato का गिग वर्क सिस्टम लगातार बदलता रहता है, जहां लोगों का आना-जाना बना रहता है।
उनका कहना था कि फूड डिलीवरी को कई लोग स्थायी करियर की बजाय अस्थायी कमाई का जरिया मानते हैं। अचानक पैसों की जरूरत पड़ने पर लोग इस काम को चुनते हैं और जरूरत पूरी होते ही प्लेटफॉर्म छोड़ देते हैं।
कंपनी के बिजनेस में भी आया बड़ा बदलाव
पिछले कुछ समय तक Eternal का सबसे बड़ा बिजनेस फूड डिलीवरी ही था, लेकिन अब तस्वीर बदल चुकी है।
कंपनी की क्विक कॉमर्स यूनिट Blinkit ने ग्रोथ के मामले में फूड डिलीवरी को पीछे छोड़ दिया है।
हालांकि इसके बावजूद, गुरुग्राम बेस्ड Zomato अभी भी कंपनी के लिए सबसे ज्यादा मुनाफा देने वाला प्लेटफॉर्म बना हुआ है।
इसके अलावा Eternal, ‘गोइंग आउट’ से जुड़ा डिस्ट्रिक्ट बिजनेस और B2B ग्रोसरी सप्लाई यूनिट Hyperpure भी संचालित करता है।
आखिर क्यों होती है बड़ी संख्या में छंटनी?
गिग वर्कर्स को हटाए जाने के कारणों पर बात करते हुए दीपिंदर गोयल ने कहा कि कई मामलों में फ्रॉड और गलत गतिविधियां इसकी वजह बनती हैं।
कुछ डिलीवरी पार्टनर बिना खाना पहुंचाए ही ऑर्डर को डिलीवर दिखा देते हैं, वहीं कुछ मामलों में कैश-ऑन-डिलीवरी ऑर्डर में ग्राहकों को सही चेंज न देना जैसी शिकायतें सामने आती हैं।
कंपनी का कहना है कि ऐसे मामलों में सख्त कदम उठाना जरूरी हो जाता है, ताकि प्लेटफॉर्म की विश्वसनीयता बनी रहे।
गिग वर्क मॉडल और सुविधाओं पर CEO का नजरिया
गिग वर्कर्स के अधिकारों और सुविधाओं को लेकर उठ रहे सवालों पर दीपिंदर गोयल ने साफ कहा कि
PF, फिक्स्ड सैलरी या स्थायी शिफ्ट जैसी मांगें गिग मॉडल की प्रकृति से मेल नहीं खातीं।
उनके अनुसार, डिलीवरी पार्टनर्स को पूरी आज़ादी दी जाती है—
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वे कब काम करना चाहते हैं
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किस इलाके में डिलीवरी करना चाहते हैं
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और कब लॉग-इन या लॉग-आउट करना है
यह सब कुछ वर्कर खुद तय करता है। यही लचीलापन इस मॉडल की सबसे बड़ी ताकत है।
Zomato CEO का यह बयान गिग इकॉनमी की उस सच्चाई को सामने लाता है, जहां आज़ादी के साथ-साथ अनिश्चितता भी जुड़ी हुई है।
एक तरफ ये प्लेटफॉर्म लाखों लोगों को कमाई का मौका देते हैं, वहीं दूसरी ओर हर महीने बड़ी संख्या में लोगों का सिस्टम से बाहर होना इस मॉडल की सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभर रहा है।
