Egg Boiling Time: उबला अंडा ज़्यादातर लोगों की डेली डाइट का हिस्सा होता है। यह जल्दी बनने वाला, सस्ता और प्रोटीन से भरपूर फूड माना जाता है। जिम जाने वालों से लेकर हेल्दी लाइफस्टाइल फॉलो करने वाले लोग तक, सभी उबले अंडे को अपनी डाइट में शामिल करते हैं। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि बहुत से लोग अंडा सही तरीके से उबाल ही नहीं पाते।
किसी का अंडा जरूरत से ज्यादा उबल जाता है, तो किसी का अंदर से अधपका रह जाता है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या अंडा उबालने का कोई परफेक्ट तरीका सच में मौजूद है? और अगर है, तो क्या उसका सीधा असर स्वाद और सेहत दोनों पर पड़ता है? हालिया रिसर्च इसी सवाल का जवाब देती है।
Egg Boiling Time: देखने में आसान, लेकिन अंडा उबालना क्यों होता है मुश्किल?
अंडा उबालना देखने में बेहद आसान लगता है, लेकिन सही टेक्सचर पाना उतना ही मुश्किल होता है। अक्सर ऐसा देखा जाता है कि अंडे की जर्दी सूखी, सख्त और चूरा-सी हो जाती है, जबकि सफेदी कभी-कभी चिपचिपी रह जाती है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि अंडे की जर्दी और सफेदी अलग-अलग तापमान पर पकती हैं।
वैज्ञानिक रूप से देखा जाए तो जर्दी करीब 65 डिग्री सेल्सियस पर पकने लगती है, जबकि सफेदी को सही तरीके से पकने के लिए लगभग 85 डिग्री सेल्सियस तापमान चाहिए। आमतौर पर जब लोग अंडे को सीधे उबलते पानी यानी 100 डिग्री सेल्सियस में डाल देते हैं, तो सफेदी तो ठीक से पक जाती है, लेकिन जर्दी जरूरत से ज्यादा सख्त हो जाती है। वहीं, अगर कम तापमान पर पकाया जाए, तो जर्दी नरम रह जाती है और सफेदी अधपकी।
यहीं से परफेक्ट उबले अंडे की समस्या शुरू होती है।
अंडा उबालने का नया साइंटिफिक तरीका क्या है?
अब इस पुरानी समस्या का हल साइंस ने खोज लिया है।
इटली की नेशनल रिसर्च काउंसिल के वैज्ञानिक पेलेग्रिनो मुस्टो की अगुआई में की गई एक रिसर्च में अंडा पकाने का एक नया तरीका बताया गया है, जिसे “Periodic Cooking” कहा जाता है।
इस तरीके में अंडे को कुल 32 मिनट तक पकाया जाता है, लेकिन एक ही तापमान पर नहीं। प्रक्रिया के दौरान अंडे को कभी 100 डिग्री सेल्सियस के उबलते पानी में रखा जाता है और कभी करीब 30 डिग्री सेल्सियस के गुनगुने पानी में।
इस लगातार बदलते तापमान की वजह से जर्दी का तापमान लगभग 67 डिग्री सेल्सियस पर स्थिर रहता है, जबकि सफेदी अलग-अलग तापमान से गुजरते हुए पूरी तरह पक जाती है। इसका नतीजा यह होता है कि जर्दी न ज्यादा सख्त होती है और न ही कच्ची, बल्कि क्रीमी और मुलायम बनी रहती है, जबकि सफेदी सही तरीके से पक जाती है।
स्वाद और बनावट में क्या फर्क पड़ता है?
रिसर्चर्स ने आधुनिक तकनीकों की मदद से इस तरीके से पकाए गए अंडों की बनावट, स्वाद और केमिकल स्ट्रक्चर की जांच की। जांच में सामने आया कि Periodic Cooking Method से बने अंडे न सिर्फ दिखने में बेहतर होते हैं, बल्कि उनका स्वाद और टेक्सचर भी पारंपरिक तरीके से उबले अंडों की तुलना में ज्यादा अच्छा होता है।
सेहत के लिहाज़ से क्यों ज्यादा फायदेमंद है यह तरीका?
सही तरीके से उबले अंडे सिर्फ स्वाद के मामले में ही नहीं, बल्कि सेहत के लिहाज़ से भी ज्यादा फायदेमंद माने जा रहे हैं। रिसर्च में यह भी पाया गया कि इस तरीके से पकाए गए अंडों में Polyphenols की मात्रा ज्यादा होती है।
पॉलीफेनॉल्स ऐसे माइक्रोन्यूट्रिएंट्स हैं, जिनमें एंटीऑक्सिडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं। स्टडी के मुताबिक, जिन लोगों की डाइट में पॉलीफेनॉल्स की मात्रा अधिक होती है, उनमें दिल की बीमारियों, कैंसर और न्यूरोडीजेनेरेटिव रोगों का खतरा कम देखा गया है।
उबला अंडा भले ही एक सिंपल फूड लगे, लेकिन उसे सही तरीके से पकाना बेहद जरूरी है। परफेक्ट तापमान और साइंटिफिक तरीके से उबला अंडा न सिर्फ बेहतर स्वाद और टेक्सचर देता है, बल्कि उसकी न्यूट्रिशन वैल्यू भी ज्यादा अच्छी बनी रहती है।
अगर आप भी रोज अंडा खाते हैं, तो अगली बार सिर्फ उबालने पर नहीं, बल्कि सही तरीके से उबालने पर ध्यान दें। क्योंकि जब अंडा सही तरीके से पकता है, तो उसका फायदा भी दोगुना होता है।
