यमन के मुकल्ला पोर्ट पर एयरस्ट्राइक, 24 घंटे का अल्टीमेटम, 90 दिन की इमरजेंसी
Saudi Arabia Airstrike: इजरायल-हमास युद्ध की आग अभी ठंडी भी नहीं पड़ी है कि पश्चिम एशिया में एक और बड़ा भू-राजनीतिक टकराव सामने आ गया है। इस बार मामला सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे दो करीबी सहयोगी देशों के बीच तनाव का है। यमन के मुकल्ला बंदरगाह पर सऊदी अरब द्वारा की गई एयर-स्ट्राइक ने पूरे क्षेत्र में हलचल मचा दी है।
Saudi Arabia Airstrike: मुकल्ला पोर्ट पर क्यों हुआ सऊदी का हमला?
सऊदी अरब ने यमन के मुकल्ला पोर्ट पर खड़े दो समुद्री जहाजों पर हवाई हमला किया, जिनमें मिलिट्री व्हीकल और अन्य सैन्य उपकरण लदे होने का दावा किया गया है। सऊदी का आरोप है कि ये जहाज UAE से आए थे और इनमें मौजूद हथियार यमन के विद्रोही और अलगाववादी गुटों को सप्लाई किए जाने थे।
सऊदी अधिकारियों के मुताबिक,
“इन कॉम्बैट व्हीकल का इस्तेमाल सऊदी के इलाकों में हमलों के लिए किया जा सकता था, जो हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सीधा खतरा था।”
इसी आधार पर सऊदी ने इस शिपमेंट को “रेड लाइन” बताते हुए तबाह कर दिया।
UAE को 24 घंटे का अल्टीमेटम
हमले के बाद सऊदी अरब ने यूएई को सीधी चेतावनी देते हुए कहा कि वह 24 घंटे के भीतर यमन से अपनी फौज वापस बुलाए।सऊदी ने अपने दावे के समर्थन में UAE के फुजैराह बंदरगाह का ड्रोन वीडियो भी जारी किया, जिसमें कथित तौर पर उन सैन्य गाड़ियों को जहाजों पर लादते हुए दिखाया गया है। सऊदी ने यमन में सक्रिय अलगाववादी गतिविधियों के लिए यूएई को जिम्मेदार ठहराया और अबू धाबी को चेताया कि उसकी हरकतें पूरे क्षेत्र को युद्ध की ओर धकेल सकती हैं।
यमन में 90 दिन की इमरजेंसी, नाकाबंदी लागू
इस घटनाक्रम के बाद यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार की
प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल (PLC) ने देश में 90 दिनों की इमरजेंसी घोषित कर दी।
इसके साथ ही:
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UAE के साथ संयुक्त रक्षा समझौता रद्द
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72 घंटे के लिए हवाई, समुद्री और जमीनी नाकाबंदी
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सुरक्षा बलों को हाई अलर्ट
PLC का कहना है कि यह फैसला दक्षिणी अलगाववादी गुटों की बढ़ती गतिविधियों के जवाब में लिया गया है।
BIG: Saudi airstrikes hit Yemen’s Mukalla Port, targeting ships from the UAE carrying armored vehicles and weapons for UAE-backed Southern Transitional Council (STC) separatists.
Tensions between Saudi-backed and UAE-backed forces have escalated sharply after pro-UAE forces… pic.twitter.com/ExPP78VVTz
— Clash Report (@clashreport) December 30, 2025
STC का कब्जा और बढ़ता संकट
यमन में सक्रिय सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल (STC), जिसे यूएई का समर्थन हासिल है,
हाल ही में हदरामौत और महरा प्रांतों के बड़े हिस्सों पर कब्जा कर चुकी है। ये इलाके संसाधनों से भरपूर माने जाते हैं और रणनीतिक रूप से बेहद अहम हैं।
PLC प्रमुख रशद अल-अलीमी ने इसे
“अस्वीकार्य विद्रोह”
बताते हुए STC को सऊदी समर्थित सेनाओं को इलाके सौंपने का आदेश दिया।
टूट सकती है यमन की सरकार?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस टकराव से पहले से ही कमजोर यमनी सरकार के पूरी तरह टूटने का खतरा बढ़ गया है। यमन में अलग-अलग गुटों को कभी सऊदी तो कभी यूएई कासमर्थन मिलता रहा है, लेकिन अब यही समर्थन आपसी टकराव की वजह बनता दिख रहा है।
सबसे बड़ा खतरा यह है कि इस संघर्ष से ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के साथ चल रही शांति बातचीत भी पटरी से उतर सकती है। याद दिला दें कि हूतियों ने 2014 में राजधानी सना पर कब्जा कर लिया था, जिसके बाद सऊदी के नेतृत्व में सैन्य हस्तक्षेप शुरू हुआ था।
पश्चिम एशिया एक और युद्ध के मुहाने पर?
इजरायल-हमास युद्ध, ईरान की सक्रियता और अब सऊदी-UAE तनाव—
ये सभी संकेत दे रहे हैं कि पश्चिम एशिया एक बार फिर बड़े क्षेत्रीय संघर्ष की ओर बढ़ सकता है।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि
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क्या यूएई सऊदी के अल्टीमेटम को मानेगा?
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या यह टकराव खुले सैन्य संघर्ष में बदल जाएगा?
आने वाले 24–72 घंटे पूरे मध्य-पूर्व की राजनीति के लिए निर्णायक साबित हो सकते हैं।
