Youngest Indian billionaire: चेन्नई से सिलिकॉन वैली तक, AI की दुनिया में गूगल को टक्कर देने वाला भारतीय
कभी किसी ने सोचा था कि भारत का एक इंजीनियर ऐसा सर्च इंजन बनाएगा जो खुद Google को चुनौती दे देगा?
ये कहानी है अरविंद श्रीनिवासन (Aravind Srinivas) की — वो युवा उद्यमी जिन्होंने दुनिया को दिखा दिया कि जब सोच बड़ी हो, तो देश की सीमाएँ मायने नहीं रखतीं।
Youngest Indian billionaire: चेन्नई का वो लड़का, जिसे मशीनों से प्यार था
अरविंद का जन्म चेन्नई, तमिलनाडु में हुआ।
बचपन से ही उन्हें टेक्नोलॉजी में गहरी दिलचस्पी थी — मशीनें कैसे सोचती हैं, कैसे सीखती हैं, यही उनका जुनून बन गया।
स्कूल के दिनों से ही वो अलग तरह से सोचते थे, और यही सोच उन्हें पहुँचा गई भारत के सबसे प्रतिष्ठित संस्थान IIT Madras तक।
IIT से Berkeley तक का सफर
IIT Madras से B.Tech + M.Tech की डिग्री लेने के बाद अरविंद ने अपनी पढ़ाई को यहीं खत्म नहीं किया।
उन्होंने कदम रखा University of California, Berkeley में, जहाँ उन्होंने कंप्यूटर साइंस में PhD की।
यहीं से शुरू हुआ उनका असली सफर — आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में।
Google छोड़कर कुछ अपना करने का सपना
PhD पूरी करने के बाद अरविंद ने Google Brain और DeepMind जैसी बड़ी AI कंपनियों में काम किया।
लेकिन भीतर से वो हमेशा महसूस करते थे कि “सर्च इंजन को सिर्फ लिंक नहीं, सटीक जवाब देने चाहिए।”
और इसी सोच से 2022 में उन्होंने अपनी खुद की कंपनी शुरू की — Perplexity AI।
Perplexity AI — सर्च नहीं, जवाब देने वाला इंजन
Perplexity AI की खासियत यह है कि ये ChatGPT की तरह सवालों का जवाब देता है, लेकिन सटीक और फैक्ट-बेस्ड तरीके से।
यह सिर्फ लिंक नहीं दिखाता, बल्कि आपकी क्वेरी का सही उत्तर पेश करता है — इंसानी टोन में, बातचीत की तरह।
इसलिए इसे “Answer Engine” कहा जाता है, ना कि “Search Engine”।
अरविंद बने भारत के सबसे युवा अरबपति
Perplexity की सफलता इतनी तेज़ी से बढ़ी कि कुछ ही सालों में अरविंद की नेटवर्थ अरबों में पहुँच गई।
Times of India की रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में वे भारत के सबसे युवा अरबपति (Youngest Billionaire) बन चुके हैं।
चेन्नई से निकला एक साधारण छात्र अब दुनिया के बड़े निवेशकों के बीच चर्चा का विषय बन चुका है।
AI की दुनिया में नया बादशाह
Perplexity को अब “ChatGPT का सबसे बड़ा राइवल” कहा जाता है।
अरविंद का कहना है कि भविष्य में सर्च इंजन का मतलब “लिंक” नहीं होगा, बल्कि सटीक संवाद होगा।
उनकी सोच सीधी है —
“हम चाहते हैं कि इंसान सर्च इंजन से बात करे, न कि सिर्फ टाइप करे।”
