Mobile Radiation Cancer Risk: आज के समय में मोबाइल फोन हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। भारत में बड़ी संख्या में लोग रात को सोने से पहले मोबाइल स्क्रॉल करते हैं और फिर उसी फोन को सिरहाने रखकर सो जाते हैं। यह आदत इतनी आम हो चुकी है कि लोग इसके संभावित नुकसान के बारे में सोचते भी नहीं।
लेकिन सवाल उठता है— क्या सिर के पास मोबाइल रखकर सोने से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का खतरा हो सकता है?
Mobile Radiation Cancer Risk: मोबाइल फोन से निकलने वाला रेडिएशन आखिर है क्या?
मोबाइल फोन रेडियो फ्रीक्वेंसी तरंगें छोड़ते हैं, जिन्हें नॉन-आयोनाइजिंग रेडिएशन कहा जाता है।
यह वही कैटेगरी है जिसमें वाई-फाई, ब्लूटूथ और रेडियो सिग्नल आते हैं।
इस तरह का रेडिएशन:
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सीधे डीएनए को नुकसान नहीं पहुंचाता
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कोशिकाओं को तोड़ने की क्षमता नहीं रखता
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एक्स-रे या रेडियोधर्मी किरणों जैसा खतरनाक नहीं होता
इसी वजह से मोबाइल रेडिएशन को लेकर डर जरूर है, लेकिन वैज्ञानिक स्तर पर इसे बेहद सीमित जोखिम वाला माना जाता है।
क्या मोबाइल रेडिएशन से कैंसर होता है?
अब तक हुए बड़े और लंबे समय के वैज्ञानिक अध्ययनों में मोबाइल फोन और ब्रेन कैंसर के बीच कोई सीधा संबंध साबित नहीं हुआ है।
दुनिया भर में करोड़ों लोग पिछले 20–25 सालों से मोबाइल का इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन कैंसर के मामलों में वैसी बढ़ोतरी नहीं देखी गई, जो मोबाइल को इसका कारण साबित कर सके।
हालांकि, यह भी कहा जाता है कि विज्ञान में किसी भी चीज़ को 100% सुरक्षित या 100% खतरनाक घोषित करना आसान नहीं होता। इसी वजह से मोबाइल रेडिएशन को पूरी तरह निर्दोष भी नहीं कहा जाता।
तो फिर डर क्यों बना रहता है?
मोबाइल रेडिएशन को “संभावित रूप से जोखिम वाला” माना जाता है। इसका मतलब यह नहीं कि इससे कैंसर होता ही है, बल्कि यह कि लंबे समय तक इसके असर को पूरी तरह नकारा भी नहीं जा सकता।
यानी:
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अभी तक पुख्ता सबूत नहीं मिले
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लेकिन एहतियात बरतना समझदारी है
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खासतौर पर तब, जब फोन लंबे समय तक शरीर के बेहद पास रखा जाए
असली नुकसान: कैंसर नहीं, नींद और दिमाग पर असर
डॉक्टरों और हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक मोबाइल का सबसे बड़ा असर नींद और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है।
जब फोन सिर के पास होता है:
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स्क्रीन की रोशनी दिमाग को एक्टिव रखती है
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नोटिफिकेशन और वाइब्रेशन दिमाग को आराम नहीं करने देते
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नींद की गहराई कम हो जाती है
इसका नतीजा होता है:
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बार-बार नींद टूटना
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थकान और चिड़चिड़ापन
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ध्यान की कमी
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लंबे समय में तनाव और मानसिक परेशानी
चार्जिंग के दौरान फोन पास रखना क्यों खतरनाक है?
बहुत से लोग फोन को चार्जिंग पर लगाकर सिरहाने रखकर सो जाते हैं। यह आदत ज्यादा जोखिम भरी मानी जाती है, क्योंकि:
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फोन ओवरहीट हो सकता है
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बैटरी खराब होने पर आग लगने का खतरा रहता है
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तकिये या बिस्तर के पास फोन होने से हादसे की आशंका बढ़ जाती है
इसलिए विशेषज्ञ चार्जिंग पर फोन रखकर सोने से मना करते हैं।
डॉक्टरों की सलाह: क्या करना चाहिए?
सोते समय फोन को सिरहाने न रखें
फोन को बिस्तर से कम से कम 3–4 फीट दूर रखें
चार्जिंग पर फोन रखकर सोने से बचें
सोने से 30 मिनट पहले स्क्रीन से दूरी बनाएं
जरूरत हो तो एयरप्लेन मोड का इस्तेमाल करें
ये आदतें न सिर्फ रेडिएशन एक्सपोजर कम करती हैं, बल्कि नींद की क्वालिटी भी बेहतर बनाती हैं।
अब तक के वैज्ञानिक सबूत यह नहीं कहते कि सिरहाने मोबाइल रखकर सोने से कैंसर हो जाता है।
लेकिन यह जरूर साबित हुआ है कि यह आदत नींद, मानसिक स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए नुकसानदायक हो सकती है।
इसलिए डरने की नहीं, समझदारी दिखाने की जरूरत है।
फोन को थोड़ा दूर रखें और सेहत को प्राथमिकता दें।
छोटी-छोटी आदतें ही लंबे समय में बड़ा फर्क पैदा करती हैं।
