GST New Tax Slabs 2025 : दो स्लैब में बदलाव, 22 सितंबर से लागू – आम आदमी को मिलेगी बड़ी राहत
नई दिल्ली अपडेट – सितंबर 2025
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में हुई जीएसटी काउंसिल की बैठक में ऐतिहासिक फैसला लिया गया है। टैक्स सिस्टम को सरल बनाने और जनता को राहत देने के लिए अब चार मुख्य स्लैब (5%, 12%, 18% और 28%) को घटाकर दो प्रमुख स्लैब (5% और 18%) कर दिया गया है। इसके अलावा, लक्ज़री और हानिकारक उत्पादों (सिन गुड्स) पर एक 40% विशेष दर लागू होगी।
इस सुधार को ‘जीएसटी 2.0’ नाम दिया गया है और इसे 22 सितंबर 2025 (नवरात्रि का पहला दिन) से लागू किया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे “दिवाली गिफ्ट” बताते हुए कहा कि यह कदम आम नागरिकों का बोझ कम करेगा और अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा देगा।
GST New Tax Slabs 2025: जीएसटी स्लैब में मुख्य बदलाव
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5% स्लैब
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पहले 12% स्लैब में आने वाली 99% वस्तुएं अब 5% पर आएंगी।
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उदाहरण: दवाएं, प्रोसेस्ड फूड (बिस्किट, ब्रेड), कपड़े, जूते, पेंसिल, एक्सरसाइज बुक, प्रेशर कुकर, साइकिल आदि।
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18% स्लैब
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पहले 28% स्लैब में आने वाली 90% वस्तुएं अब 18% पर होंगी।
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उदाहरण: एयर कंडीशनर, रेफ्रिजरेटर, वॉशिंग मशीन, सीमेंट, पेंट, टीवी, बाइक आदि।
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40% विशेष दर
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यह लक्ज़री और सिन गुड्स पर लागू होगी।
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उदाहरण: लग्ज़री कारें, 350cc से ऊपर की बाइक, शुगर ड्रिंक्स, एरेटेड बेवरेजेज, पान मसाला, गुटखा, तंबाकू प्रोडक्ट्स।
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हालांकि, तंबाकू और पान मसाला पर 40% स्लैब फिलहाल टाल दिया गया है। ये अभी पुराने GST + सेस रेट पर ही रहेंगे।
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कम दरें बरकरार
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कुछ खास वस्तुएं जैसे डायमंड (0.25%), सोना (3%) और जीवन रक्षक दवाएं पूरी तरह कर मुक्त होंगी।
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दूध और पनीर जैसी रोज़मर्रा की चीजें अब 0% पर होंगी।
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कौन-सी चीजें सस्ती होंगी?
| वस्तु का नाम | पुरानी दर | नई दर | प्रभाव |
|---|---|---|---|
| दवाएं (ज्यादातर) | 12% | 5% | सस्ती होंगी, कैंसर की कई दवाएं कर-मुक्त |
| प्रसंस्कृत खाद्य | 12% | 5% | बिस्किट, ब्रेड जैसी चीजें सस्ती |
| कपड़े और जूते | 12% | 5% | आम आदमी की जेब हल्की होगी |
| साइकिल, कुकर | 12% | 5% | घरेलू उपयोग का सामान सस्ता |
| एयर कंडीशनर, फ्रिज | 28% | 18% | घर चलाना होगा आसान |
| सीमेंट, पेंट | 28% | 18% | मकान बनाने की लागत कम |
| टीवी, बाइक | 28% | 18% | इलेक्ट्रॉनिक्स और वाहन सस्ते |
| दूध, पनीर | 5%/12% | 0% | पूरी तरह टैक्स-फ्री |
अन्य बड़े फैसले
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इंश्योरेंस पर राहत: व्यक्तिगत स्वास्थ्य और जीवन बीमा पॉलिसी पर अब कोई GST नहीं लगेगा। अनुमान है कि इससे हर साल जनता को लगभग 9,700 करोड़ रुपये की बचत होगी।
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किसानों को फायदा: कृषि उपकरणों और इनपुट्स (जैसे केन्दु पत्ते) पर GST घटाकर 5% कर दिया गया है।
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रियल एस्टेट सेक्टर: सीमेंट और टाइल्स सस्ते होने से घर बनाने की लागत घटेगी।
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ऑटोमोबाइल: छोटी कारें सस्ती, बड़ी कारें महंगी होंगी।
राजस्व और आर्थिक असर
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सरकार का मानना है कि शुरुआत में राजस्व घट सकता है, लेकिन बढ़ी खपत और कर चोरी कम होने से इसकी भरपाई हो जाएगी।
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वर्तमान में 18% स्लैब से 67% राजस्व आता है, और 28% से 11%। अब औसत GST दर घटकर 11.6% से नीचे जाएगी।
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मार्च 2026 तक कंपेंसेशन सेस को खत्म कर दिया जाएगा और इसे 40% स्लैब में शामिल किया जाएगा।प्रक्रिया सुधार
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प्री-फिल्ड जीएसटी रिटर्न,
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तेज रिफंड सिस्टम,
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सरल रजिस्ट्रेशन,
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और GST अपीलीय न्यायाधिकरण (GSTAT) की शुरुआत।
चुनौतियां और आलोचना
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कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि 5%–18%–40% के बजाय एक यूनिफॉर्म टैक्स (12-13%) ज्यादा बेहतर होता।
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12% से 5% पर जाने से इनपुट टैक्स क्रेडिट में गड़बड़ी हो सकती है।
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पेट्रोलियम, बिजली, शराब और स्टैंप ड्यूटी अभी भी GST के दायरे से बाहर हैं।
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कुछ राज्य 40% से भी ज्यादा टैक्स की मांग कर रहे हैं, लेकिन केंद्र ने साफ इंकार कर दिया है।
जीएसटी 2.0 भारत के टैक्स ढांचे का अब तक का सबसे बड़ा सुधार है।
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आम जनता को रोज़मर्रा के सामान, दवाओं और इंश्योरेंस में बड़ी राहत मिलेगी।
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किसानों और स्वास्थ्य क्षेत्र को सीधा लाभ होगा।
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वहीं, लक्ज़री और हानिकारक वस्तुओं पर सख्त टैक्स लगाकर सरकार ने संतुलन साधा है।
22 सितंबर 2025 से लागू होने वाला यह बदलाव मोदी सरकार की “जनहित + सरल कर व्यवस्था” की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।
