Manisha Rape case 2025:हरियाणा की बेटी मनीषा ,पनों से लिपटी एक दर्दनाक मौत, इंसाफ़ की गूंज
हरियाणा के भिवानी ज़िले से आई यह खबर किसी का भी दिल दहला देने के लिए काफी है। 19 साल की मनीषा, जो प्ले स्कूल में बच्चों को पढ़ाती थी और नर्सिंग में करियर बनाना चाहती थी, आज हमारे बीच नहीं रही। 11 अगस्त को लापता हुई इस बेटी का शव 13 अगस्त को सिन्धानी गांव की नहर के पास मिला। गला रेतकर, चेहरा जलाकर पहचान मिटाने की कोशिश की गई। यह सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि इंसानियत पर लगा हुआ गहरा दाग है।
मनीषा कौन थी?
भिवानी ज़िले के दानी लक्ष्मण गांव की रहने वाली मनीषा हर किसी के लिए प्रेरणा थी। वह छोटी उम्र में ही बच्चों को पढ़ा रही थी और आगे नर्सिंग की पढ़ाई करके लोगों की सेवा करना चाहती थी। उसके माता–पिता ने तमाम मुश्किलों के बावजूद उसकी पढ़ाई में हमेशा साथ दिया। लेकिन 19 साल की उम्र में ही उसके सपनों और उसकी जिंदगी दोनों को बेरहमी से छीन लिया गया।
घटना की पूरी टाइमलाइन
- 11 अगस्त 2025: मनीषा नर्सिंग कोर्स का फॉर्म भरने गई थी, लेकिन वापस नहीं लौटी।
- 13 अगस्त 2025: सिन्धानी गांव की नहर के पास उसका शव बरामद हुआ।
- अपराध की क्रूरता: पहले बलात्कार, फिर हत्या। गला काटा गया और चेहरा जलाया गया ताकि पहचान छुपाई जा सके।
यह सब सुनकर किसी का भी कलेजा कांप उठे।
पुलिस की कार्रवाई पर सवाल
परिवार का कहना है कि जब उन्होंने पुलिस को शिकायत दी, तो इसे गंभीरता से नहीं लिया गया। पुलिस ने कहा, “लड़की भाग गई होगी।” यही शुरुआती लापरवाही अब लोगों के गुस्से की सबसे बड़ी वजह है।
फिलहाल मामले की जांच जारी है। खबर है कि लापरवाही बरतने वाले कुछ पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया है या नहीं अभी तक इस की कोई अधिकारिक रिपोर्ट सामने नहीं आए है, और अभी तक किसी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई। परिवार का साफ कहना है — “जब तक दोषी पकड़े नहीं जाते, हम अंतिम संस्कार नहीं करेंगे।“
सोशल मीडिया पर गुस्सा
सोशल मीडिया पर यह मामला तेज़ी से फैल रहा है। ट्विटर (अब X) पर #JusticeForManisha और #Justice_for_Manisha हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं। हजारों लोग इंसाफ की मांग कर रहे हैं और दोषियों के लिए फांसी की सजा की अपील कर रहे हैं।
लोग हरियाणा सरकार और पुलिस से पूछ रहे हैं:
- कब तक हमारी बेटियां असुरक्षित रहेंगी?
- क्यों हर बार पुलिस शिकायत को हल्के में लेती है?
- क्या इस बार दोषियों को तुरंत सजा मिलेगी?
यह सिर्फ एक केस नहीं, समाज के लिए चेतावनी
मनीषा का मामला हमें यह याद दिलाता है कि बेटियों की सुरक्षा सिर्फ नारेबाज़ी का विषय नहीं, बल्कि सिस्टम की जिम्मेदारी है। एक तरफ हम “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” की बातें करते हैं, वहीं दूसरी तरफ मनीषा जैसी बेटियां अपने सपनों के साथ कब्र में उतार दी जाती हैं। आज हर कोई यही मांग कर रहा है कि इस केस की जांच तेज़ी से हो और दोषियों को ऐसी सज़ा मिले कि भविष्य में कोई और मनीषा इस दरिंदगी का शिकार न बने।मनीषा की मौत ने पूरे हरियाणा ही नहीं, बल्कि पूरे देश को हिला दिया है। उसकी कहानी हमें सोचने पर मजबूर करती है कि हम किस समाज में जी रहे हैं। वह बेटी जो दूसरों की जान बचाने का सपना देख रही थी, अपनी ही जान न बचा सकी।
आज पूरा समाज एक ही आवाज़ में कह रहा है:
“दोषियों को फाँसी दो, ताकि किसी और की मनीषा का सपना अधूरा न रह जाए।“